ये कहानी एक ऐसे नवयुवक की है जिसने अपने जीवन के पचास सावन तो देख लिये हैं पर उस लड्डू का स्वाद बदकिस्मती (खुशकिस्मती) से अभी तक नहीं चख पाया है जिसके बारे में कहा जाता है कि बंदा उसे खा कर भी पछताता है और ना खाये तो बौराया हुआ सा मादाओं की तरफ आकर्षित हुआ सा पछताता घूमता रहता है।
इस नवयुवक के बारे में थोड़ा आपको बता दूँ जिसका नाम राहुल (काल्पनिक नाम) है जिसका ना ही राहुल गाँधी से कोई लेना देना है और ना ही उसके घर की जमीन का राहुल गाँधी के जीजा जी से।
राहुल रोज़ सुबह घर से नाश्ता करके निकलने के बाद स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की एक शाखा में सुबह नों से पाँच बजे तक कुर्सी तोड़ने और लंचियाने का काम करता है और बैंक में किये जाने वाले उसके तीसरे काम के बारे बताने की जरूरत नहीं है वो आप सभी मित्र भले भांति समझ ही गये होंगे।
इन दिन दिन करके बीतते पचास सावनों में राहुल का शरीर अपने आकर का विस्तार करते हुए एक चलती फिरती गोश्त की दुकान से होता हुआ धीरे धीरे कांग्रेस की सरकार में बढ़ चढ़कर हुए घोटालों की तरह बढ़ता हुआ तन्मय भट्ट का रूप ले चुका था, उसके शरीर के विशालकाय होने के पीछे उसकी खाने का अनादर ना करने की उसकी आदत का उतना ही बड़ा योगदान रहा है जितना पाकिस्तान की हार में मिस्बाह उल हक़ का पाकिस्तानी टीवीयां तुड़वा देने वाले स्ट्राइक रेट का रहता है।
यहाँ तक की राहुल को उसका कोई दोस्त या रिश्तेदार कुर्सी पर बैठने तक के लिये नहीं कह पाता है उसका कारण आप नीचे वाली तस्वीर में देख सकते हैं।
व्यवहारिक भाषा में आप राहुल को "भूख का फूफा" भी कह सकते हैं सिर्फ इतना ही नहीं राहुल के घर के आस पास पंद्रह बीस किलोमीटर के दायरे में जब कभी कोई चिकन बनाने की हिम्मत जुटाता है तो उसे मरे हुए मुर्गे को बताना पड़ता है कि राहुल नहीं आया है तब जाकर मुर्गा बनने को राजी होता है, राहुल के आस पास के स्कूलों में टीचर इसी डर की वजह से बच्चों को मुर्गा बनाने का जोखिम भी उठाने से पहले दस बार सोचते हैं और फिर उसे ना ही उठाने का फैसला लेते हैं।
वैसे राहुल के दिल के अंदर दूल्हा बनने की तमन्ना सलमान खान की "मैंने प्यार किया" का टिकट ना मिल पाने की वजह से फ़िल्म के पोस्टर देखकर घर लौटने के बाद से ही फन फनाने लगी थी पर कोई भी लड़की इतना साहसिक कदम उठाने के लिये तैयार ही नहीं होती थी, राहुल ने अपनी शादी के लिये कई जगह मन्नते माँगी थी जिनको ऊपर वाला पूरी करने का नाम ही नहीं लेता था हालाँकि भगवान इंसान के द्वारा मन्नत में माँगी हुई मुसीबत पलक झपकने से पहले ही उसे दे देता है पर यहाँ राहुल की सारी प्राथनायें भगवान के स्पैम फोल्डर में पहुँच रही थी।
मामला इतना पेचीदा था कि सभी रिश्तेदार और मित्र राहुल का कहीं ना कहीं टांका फिट करवाने के लिए चुनाव के दौरान हमारे नेताओं द्वारा इस्तमाल में लाने वाली "गधे को बाप बना लेने" वाली तकनीक तक आज़माने के लिये तैयार बैठे थे।
जैसे हमारे देश में हमेशा होता है बहुत कोशिश करने के बाद राहुल की दूर की एक बुआ को अपनी सास की ननंद की भाभी के मामा की चाची के मौसा की छोटी बहन की एक "लल्ली" नाम की लड़की मिल गयी थी जो इस राहुल नाम की बिल्ली के गले में घंटी बाँधने को मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से तैयार थी।
बहरहाल आपको लड़की के बारे में बता दूँ लड़की कॉमेडी नाइट्स विद कपिल पर आने वाली पलक से सुंदरता के मामले में भले ही उन्नीस हो पर सेहत के मामले में पलक से भी सो मीटर की रेस हार जाये, एक बार लल्ली अपनी भाई की बारात में जोश में आकर नाच दी थी बताते हैं उस वेडिंग पॉइंट के मैदान की घास अगले दिन चमत्कारिक रूप से गायब हो ली थी और आज तक उस मैदान में घास दोबारा उगने की हिम्मत नहीं जुटा पाई है।
दोनों परिवारों की कोशिश के बाद मामला जैसे तैसे लड़का लड़की की दिखलाई की तरफ बढ़ने लगा और दोनों की मंगनी भी दिखलाई के ही एकदम बाद फिक्स करने की बात तय की गई।
सीन मंगनी का है राहुल बस ललचाई निगाहों से उसे देखे ही जा रहा था और वो भी अपनी अगले पाँच मिनट में होने वाली हालत का अंदाज़ा लगाते हुए घबराई हुई सी राहुल की तरफ देख रही थी, इस से पहले की आप लोग कोई गलत फहमी पालें मैं आपको बता दूँ यहाँ बात राहुल और टेबल पर रखी गई काजू कतली बर्फी की हो रही है लड़की तो बेचारी अभी इस कमरे में पहुँच भी नहीं पाई है।
इस से पहले की लल्ली के परिवार के लोग राहुल के सामने अपने सवालों के हथगोले दागना शुरू करें राहुल अपनी दोनों कलाइयों का इस्तमाल करते हुए आधी काजू कतली समेत टेबल पर पड़ी सभी खाने की चीजों को निपटाकर टेबल को पानीपत के मैदान का रूप दे चुका था और वास्तव में ऐसा ही लग रहा था कि मानों पानीपत की जंग सच में इसी टेबल पर ही लड़ी गयी हो।
इस "मंहगाई डायन खाय जात है" वाले ज़माने में एक स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के कर्मचारी के बैंक के अंदर दिये जाने वाली परफॉर्मेन्स की वजह से अपने घर की रसोई के आधे राशन को ख़तम होता देखकर जैसे तैसे लल्ली के बाप ने सहमी और दबी हुई आवाज से जैसे तैसे राहुल के सामने एक सवाल दागा "बेटा आने में कोई दिक्कत तो नहीं हुई ना?"
पानीपत के मैदान में बर्फी और पकोड़ों की लाशें बिछाने में मशगूल अपनी बैंक की आदत से मजबूर राहुल का जवाब "लंच के बाद आना" सुनकर लल्ली के बाप को एक बार तो लगा कि अगर इस वक़्त काजू कतली बर्फी पर भिनभिनाता मच्छर कहीं मूत्र विसर्जित कर दे तो वो उसी में डूबकर अपने प्राणों की आहूति दे जाये।
लल्ली के बाप को एक ही सवाल से अंदाज़ा लग लिया था कि राहुल से वार्तालाप करना किसी दीवार पर गेंद मारकर इस उम्मीद को बाँधने जैसा है कि वो कामरान अकमल रुपी दीवार उस गेंद को कैच कर लेगी।
जब यह सब घट रहा था तभी कमरे के अंदर लल्ली ने सर झुकाये दबे पांव प्रवेश किया और काजू कतली और राहुल की लव स्टोरी को लव ट्राइंगल का रूप दे दिया राहुल समझ ही नहीं पा रहा था कि इस सब को हैंडल करे तो आखिर करे कैसे, आनन फानन में दोनों ने एक दूसरे को देखा और एक दूसरे के लिये हामी भी भर दी। उधर राहुल के बैंक अकॉउंट के अंदर पड़ी उसकी आधी सैलरी जो राशन वाले बनिये के गल्ले में पहुँचने से बच जाती थी उसने इस हामी के बाद उसी बनिये के गल्ले में जाने के लिये अपना सामान बांधना शुरू कर दिया।
दोनों की सगाई कर दी गई सगाई में देखने वाली बात यह थी कि जो अंगूठियाँ दोनों ने एक दूसरे को पहनाई थी वो पौने इंच के हिसार जिंदल पाइप पर आराम से फिट आ जायें।
क्या हुआ सगाई के बाद? क्या राहुल को कोई घोड़ा अपने ऊपर बिठा पाया? जानने के लिये राहुल और लल्ली की मंगनी और शादी भाग II का इंतज़ार करें।
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इस नवयुवक के बारे में थोड़ा आपको बता दूँ जिसका नाम राहुल (काल्पनिक नाम) है जिसका ना ही राहुल गाँधी से कोई लेना देना है और ना ही उसके घर की जमीन का राहुल गाँधी के जीजा जी से।
राहुल रोज़ सुबह घर से नाश्ता करके निकलने के बाद स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की एक शाखा में सुबह नों से पाँच बजे तक कुर्सी तोड़ने और लंचियाने का काम करता है और बैंक में किये जाने वाले उसके तीसरे काम के बारे बताने की जरूरत नहीं है वो आप सभी मित्र भले भांति समझ ही गये होंगे।
इन दिन दिन करके बीतते पचास सावनों में राहुल का शरीर अपने आकर का विस्तार करते हुए एक चलती फिरती गोश्त की दुकान से होता हुआ धीरे धीरे कांग्रेस की सरकार में बढ़ चढ़कर हुए घोटालों की तरह बढ़ता हुआ तन्मय भट्ट का रूप ले चुका था, उसके शरीर के विशालकाय होने के पीछे उसकी खाने का अनादर ना करने की उसकी आदत का उतना ही बड़ा योगदान रहा है जितना पाकिस्तान की हार में मिस्बाह उल हक़ का पाकिस्तानी टीवीयां तुड़वा देने वाले स्ट्राइक रेट का रहता है।
यहाँ तक की राहुल को उसका कोई दोस्त या रिश्तेदार कुर्सी पर बैठने तक के लिये नहीं कह पाता है उसका कारण आप नीचे वाली तस्वीर में देख सकते हैं।
व्यवहारिक भाषा में आप राहुल को "भूख का फूफा" भी कह सकते हैं सिर्फ इतना ही नहीं राहुल के घर के आस पास पंद्रह बीस किलोमीटर के दायरे में जब कभी कोई चिकन बनाने की हिम्मत जुटाता है तो उसे मरे हुए मुर्गे को बताना पड़ता है कि राहुल नहीं आया है तब जाकर मुर्गा बनने को राजी होता है, राहुल के आस पास के स्कूलों में टीचर इसी डर की वजह से बच्चों को मुर्गा बनाने का जोखिम भी उठाने से पहले दस बार सोचते हैं और फिर उसे ना ही उठाने का फैसला लेते हैं।
वैसे राहुल के दिल के अंदर दूल्हा बनने की तमन्ना सलमान खान की "मैंने प्यार किया" का टिकट ना मिल पाने की वजह से फ़िल्म के पोस्टर देखकर घर लौटने के बाद से ही फन फनाने लगी थी पर कोई भी लड़की इतना साहसिक कदम उठाने के लिये तैयार ही नहीं होती थी, राहुल ने अपनी शादी के लिये कई जगह मन्नते माँगी थी जिनको ऊपर वाला पूरी करने का नाम ही नहीं लेता था हालाँकि भगवान इंसान के द्वारा मन्नत में माँगी हुई मुसीबत पलक झपकने से पहले ही उसे दे देता है पर यहाँ राहुल की सारी प्राथनायें भगवान के स्पैम फोल्डर में पहुँच रही थी।
मामला इतना पेचीदा था कि सभी रिश्तेदार और मित्र राहुल का कहीं ना कहीं टांका फिट करवाने के लिए चुनाव के दौरान हमारे नेताओं द्वारा इस्तमाल में लाने वाली "गधे को बाप बना लेने" वाली तकनीक तक आज़माने के लिये तैयार बैठे थे।
जैसे हमारे देश में हमेशा होता है बहुत कोशिश करने के बाद राहुल की दूर की एक बुआ को अपनी सास की ननंद की भाभी के मामा की चाची के मौसा की छोटी बहन की एक "लल्ली" नाम की लड़की मिल गयी थी जो इस राहुल नाम की बिल्ली के गले में घंटी बाँधने को मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से तैयार थी।
बहरहाल आपको लड़की के बारे में बता दूँ लड़की कॉमेडी नाइट्स विद कपिल पर आने वाली पलक से सुंदरता के मामले में भले ही उन्नीस हो पर सेहत के मामले में पलक से भी सो मीटर की रेस हार जाये, एक बार लल्ली अपनी भाई की बारात में जोश में आकर नाच दी थी बताते हैं उस वेडिंग पॉइंट के मैदान की घास अगले दिन चमत्कारिक रूप से गायब हो ली थी और आज तक उस मैदान में घास दोबारा उगने की हिम्मत नहीं जुटा पाई है।
दोनों परिवारों की कोशिश के बाद मामला जैसे तैसे लड़का लड़की की दिखलाई की तरफ बढ़ने लगा और दोनों की मंगनी भी दिखलाई के ही एकदम बाद फिक्स करने की बात तय की गई।
सीन मंगनी का है राहुल बस ललचाई निगाहों से उसे देखे ही जा रहा था और वो भी अपनी अगले पाँच मिनट में होने वाली हालत का अंदाज़ा लगाते हुए घबराई हुई सी राहुल की तरफ देख रही थी, इस से पहले की आप लोग कोई गलत फहमी पालें मैं आपको बता दूँ यहाँ बात राहुल और टेबल पर रखी गई काजू कतली बर्फी की हो रही है लड़की तो बेचारी अभी इस कमरे में पहुँच भी नहीं पाई है।
इस से पहले की लल्ली के परिवार के लोग राहुल के सामने अपने सवालों के हथगोले दागना शुरू करें राहुल अपनी दोनों कलाइयों का इस्तमाल करते हुए आधी काजू कतली समेत टेबल पर पड़ी सभी खाने की चीजों को निपटाकर टेबल को पानीपत के मैदान का रूप दे चुका था और वास्तव में ऐसा ही लग रहा था कि मानों पानीपत की जंग सच में इसी टेबल पर ही लड़ी गयी हो।
इस "मंहगाई डायन खाय जात है" वाले ज़माने में एक स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के कर्मचारी के बैंक के अंदर दिये जाने वाली परफॉर्मेन्स की वजह से अपने घर की रसोई के आधे राशन को ख़तम होता देखकर जैसे तैसे लल्ली के बाप ने सहमी और दबी हुई आवाज से जैसे तैसे राहुल के सामने एक सवाल दागा "बेटा आने में कोई दिक्कत तो नहीं हुई ना?"
पानीपत के मैदान में बर्फी और पकोड़ों की लाशें बिछाने में मशगूल अपनी बैंक की आदत से मजबूर राहुल का जवाब "लंच के बाद आना" सुनकर लल्ली के बाप को एक बार तो लगा कि अगर इस वक़्त काजू कतली बर्फी पर भिनभिनाता मच्छर कहीं मूत्र विसर्जित कर दे तो वो उसी में डूबकर अपने प्राणों की आहूति दे जाये।
लल्ली के बाप को एक ही सवाल से अंदाज़ा लग लिया था कि राहुल से वार्तालाप करना किसी दीवार पर गेंद मारकर इस उम्मीद को बाँधने जैसा है कि वो कामरान अकमल रुपी दीवार उस गेंद को कैच कर लेगी।
जब यह सब घट रहा था तभी कमरे के अंदर लल्ली ने सर झुकाये दबे पांव प्रवेश किया और काजू कतली और राहुल की लव स्टोरी को लव ट्राइंगल का रूप दे दिया राहुल समझ ही नहीं पा रहा था कि इस सब को हैंडल करे तो आखिर करे कैसे, आनन फानन में दोनों ने एक दूसरे को देखा और एक दूसरे के लिये हामी भी भर दी। उधर राहुल के बैंक अकॉउंट के अंदर पड़ी उसकी आधी सैलरी जो राशन वाले बनिये के गल्ले में पहुँचने से बच जाती थी उसने इस हामी के बाद उसी बनिये के गल्ले में जाने के लिये अपना सामान बांधना शुरू कर दिया।
दोनों की सगाई कर दी गई सगाई में देखने वाली बात यह थी कि जो अंगूठियाँ दोनों ने एक दूसरे को पहनाई थी वो पौने इंच के हिसार जिंदल पाइप पर आराम से फिट आ जायें।
क्या हुआ सगाई के बाद? क्या राहुल को कोई घोड़ा अपने ऊपर बिठा पाया? जानने के लिये राहुल और लल्ली की मंगनी और शादी भाग II का इंतज़ार करें।


Bwahahaha awesome bhai.... Mazaa as gayaa padhkar... Iss par to ek comedy film banaayi ja sakti.... Abhi take hansey ja rahaa hai.... Superb bhai
ReplyDeleteशुक्रिया भाई पढ़ने के लिए
Deleteसगाई में दोनों एक दूसरे की उँगलियों में रस्सी बांधेंगे.. क्योंकि वैज्ञानिक अभी इतना विकसित तो हुए नहीं हैं की कोई अंगूठी ऐसी बना सकें जो इस घटोत्कच्छ और टुनटुन के शरीर के साथ बढ़ती जाए.. रस्सी को कम से कम आगे जोड़ा तो जा सकेगा
ReplyDeleteहाहा तूने तो तवा ही लगा दिया डीके
DeleteHaha had hai yaar tere se kittu
ReplyDeleteशुक्रिया भाई
Deleteपौने इंच के हिसार जिंदल पाइप पर आराम से फिट आ जायें।
ReplyDelete😂😂😂😂
सलाम है किट्टू भाई आपकी कल्पनाशीलता को 😂😂😂
शुक्रिया अक्षय भाई आप लोगों का प्यार है।
Deleteबहुत ही उम्दा लेख किट्टू
ReplyDeleteशुक्रिया भाई
Deleteमिस्बाह उल हक़ को माफ़ करदो अब किट्टू भाई हाहाहा वो तो घर भी पहुँच गया होगा
ReplyDeleteहाहा ठीक है भाई
DeleteGajab dha diya bai aay blog kadu set keet tu kittu bai
ReplyDeleteशुक्रिया भाई
DeleteHahahahaha simply LOL
ReplyDeleteKittu bhai
शुक्रिया स्वपनिल भाई
DeleteMAN you are awesome hilarious as always
ReplyDeleteThanks man
DeleteBuahaha gazab kittu bhaii, aagle part ka intezar rahega 😂😂😂😂
ReplyDeleteजल्द ही प्रकाशित होगा
Deletehahahahaha...........wah ...bhai wah............gajab
ReplyDeleteशुक्रिया भाई 😂
DeleteHahahaha Hahahaha unbelievably hilarious shuru se last tak still laughing sick
ReplyDeleteThanks USMAN
DeleteHahahaha kaun hai ye Rahul kittu bhai kahin Rahul Gandhi hi to nahi
ReplyDeleteThanks Sumit
ReplyDeleteव्यंग्य,कटाक्ष एवं हास्य का अद्भुत मिश्रण हैं आपके इस लेख मैं भाई।बहुत सुन्दर लेख।शुभकामनाएं।
ReplyDeleteशुक्रिया भाई तुषार
Deletelol :) बहुत ही सही स्टेट बैंक वाली लाइन गजब थी,
ReplyDelete@PuraneeBastee
http://puraneebastee.blogspot.in/
शुक्रिया कमल भाई
ReplyDeleteHahaha shandaar kittu bhaiyya very nice - tyagi
ReplyDeleteशुक्रिया त्यागी जी
Deletehahahaha hilarious bhai panipat ka maidan wala padhkar maja aa gaya
ReplyDeleteशुक्रिया आबिद भाई
DeleteJabardast bhai maja aa gaya
ReplyDeleteशुक्रिया भाई
Deleteभाई ये कटाक्ष को वन लाइनर से ब्लॉग में तब्दील करने का हिडेन टैलेंट कहा छुपा रखा था ! बहुत आये और गए पर सही शब्दों का चुनाव कर कटाक्ष की सही परिभाषा लिखने में आपको महारत हासिल है, आपकी किताब का बेसब्री से इंतज़ार रहेगा आपका वीर अमरजीत :) राहुल बाबा की जय हो
ReplyDeleteशुक्रिया वीर, बस किरपा ए परमात्मा दी ते तुहाडे वरगे वीरां दा प्यार ए
Deleteकमाल का लिख लेते हो सिंह साहब मजा आ गया पढ़कर
ReplyDeleteबहुत ही उच्च कोटि का व्यंग्य है किट्टू भाई आपकी सोचने की छमता को सलाम करता हूँ।
ReplyDeleteHahahaha rahul gandhi hi hoga ye ladka jaroor kittu bhai doosra bhag kab aa raha hai
ReplyDeleteउच्च कोटि का व्यंग्य है किट्टू भाई हर एक लाइन में जबरदस्त पंच एक भी फ्लैट लाइन नहीं थी मजा आ गया अगले भाग का इंतज़ार है।
ReplyDeleteHahahahahahahahahahaha kittu bhai maja aa gaya kahan se soch lete ho ye sab
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