Sunday, March 22, 2015

राहुल और लल्ली की मंगनी और शादी॥ एक व्यंग्य।

ये कहानी एक ऐसे नवयुवक की है जिसने अपने जीवन के पचास सावन तो देख लिये हैं पर उस लड्डू का स्वाद बदकिस्मती (खुशकिस्मती) से अभी तक नहीं चख पाया है जिसके बारे में कहा जाता है कि बंदा उसे खा कर भी पछताता है और ना खाये तो बौराया हुआ सा मादाओं की तरफ आकर्षित हुआ सा पछताता घूमता रहता है।

इस नवयुवक के बारे में थोड़ा आपको बता दूँ जिसका नाम राहुल (काल्पनिक नाम) है जिसका ना ही राहुल गाँधी से कोई लेना देना है और ना ही उसके घर की जमीन का राहुल गाँधी के जीजा जी से।

 राहुल रोज़ सुबह घर से नाश्ता करके निकलने के बाद स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की एक शाखा में सुबह नों से पाँच बजे तक कुर्सी तोड़ने और लंचियाने का काम करता है और बैंक में किये जाने वाले उसके तीसरे काम के बारे बताने की जरूरत नहीं है वो आप सभी मित्र भले भांति समझ ही गये होंगे।

इन दिन दिन करके बीतते पचास सावनों में राहुल का शरीर अपने आकर का विस्तार करते हुए एक चलती फिरती गोश्त की दुकान से होता हुआ धीरे धीरे कांग्रेस की सरकार में बढ़ चढ़कर हुए घोटालों की तरह बढ़ता हुआ तन्मय भट्ट का रूप ले चुका था, उसके शरीर के विशालकाय होने के पीछे उसकी खाने का अनादर ना करने की उसकी आदत का उतना ही बड़ा योगदान रहा है जितना पाकिस्तान की हार में मिस्बाह उल हक़ का पाकिस्तानी टीवीयां तुड़वा देने वाले स्ट्राइक रेट का रहता है।

यहाँ तक की राहुल को उसका कोई दोस्त या रिश्तेदार कुर्सी पर बैठने तक के लिये नहीं कह पाता है उसका कारण आप नीचे वाली तस्वीर में देख सकते हैं।



व्यवहारिक भाषा में आप राहुल को "भूख का फूफा" भी कह सकते हैं सिर्फ इतना ही नहीं राहुल के घर के आस पास पंद्रह बीस किलोमीटर के दायरे में जब कभी कोई चिकन बनाने की हिम्मत जुटाता है तो उसे मरे हुए मुर्गे को बताना पड़ता है कि राहुल नहीं आया है तब जाकर मुर्गा बनने को राजी होता है, राहुल के आस पास के स्कूलों में टीचर इसी डर की वजह से बच्चों को मुर्गा बनाने का जोखिम भी उठाने से पहले दस बार सोचते हैं और फिर उसे ना ही उठाने का फैसला लेते हैं।


वैसे राहुल के दिल के अंदर दूल्हा बनने की तमन्ना सलमान खान की "मैंने प्यार किया"  का टिकट ना मिल पाने की वजह से फ़िल्म के पोस्टर देखकर घर लौटने के बाद से ही फन फनाने लगी थी पर कोई भी लड़की इतना साहसिक कदम उठाने के लिये तैयार ही नहीं होती थी, राहुल ने अपनी शादी के लिये कई जगह मन्नते माँगी थी जिनको ऊपर वाला पूरी करने का नाम ही नहीं लेता था हालाँकि भगवान इंसान के द्वारा मन्नत में माँगी हुई मुसीबत पलक झपकने से पहले ही उसे दे देता है पर यहाँ राहुल की सारी प्राथनायें भगवान के स्पैम फोल्डर में पहुँच रही थी।

मामला इतना पेचीदा था कि सभी रिश्तेदार और मित्र राहुल का कहीं ना कहीं टांका फिट करवाने के लिए चुनाव के दौरान हमारे नेताओं द्वारा इस्तमाल में लाने वाली "गधे को बाप बना लेने" वाली तकनीक तक आज़माने के लिये तैयार बैठे थे।

जैसे हमारे देश में हमेशा होता है बहुत कोशिश करने के बाद राहुल की दूर की एक बुआ को अपनी सास की ननंद की भाभी के मामा की चाची के मौसा की छोटी बहन की एक "लल्ली" नाम की लड़की मिल गयी थी जो इस राहुल नाम की बिल्ली के गले में घंटी बाँधने को मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से तैयार थी।
बहरहाल आपको लड़की के बारे में बता दूँ लड़की कॉमेडी नाइट्स विद कपिल पर आने वाली पलक से सुंदरता के मामले में भले ही उन्नीस हो पर सेहत के मामले में पलक से भी सो मीटर की रेस हार जाये, एक बार लल्ली अपनी भाई की बारात में जोश में आकर नाच दी थी बताते हैं उस वेडिंग पॉइंट के मैदान की घास अगले दिन चमत्कारिक रूप से गायब हो ली थी और आज तक उस मैदान में घास दोबारा उगने की हिम्मत नहीं जुटा पाई है।
दोनों परिवारों की कोशिश के बाद मामला जैसे तैसे लड़का लड़की की दिखलाई की तरफ बढ़ने लगा और दोनों की मंगनी भी दिखलाई के ही एकदम बाद फिक्स करने की बात तय की गई।

सीन मंगनी का है राहुल बस ललचाई निगाहों से उसे देखे ही जा रहा था और वो भी अपनी अगले पाँच मिनट में होने वाली हालत का अंदाज़ा लगाते हुए घबराई हुई सी राहुल की तरफ देख रही थी, इस से पहले की आप लोग कोई गलत फहमी पालें मैं आपको बता दूँ यहाँ बात राहुल और टेबल पर रखी गई काजू कतली बर्फी की हो रही है लड़की तो बेचारी अभी इस कमरे में पहुँच भी नहीं पाई है।
इस से पहले की लल्ली के परिवार के लोग राहुल के सामने अपने सवालों के हथगोले दागना शुरू करें राहुल अपनी दोनों कलाइयों का इस्तमाल करते हुए आधी काजू कतली समेत टेबल पर पड़ी सभी खाने की चीजों को निपटाकर टेबल को पानीपत के मैदान का रूप दे चुका था और वास्तव में ऐसा ही लग रहा था कि मानों पानीपत की जंग सच में इसी टेबल पर ही लड़ी गयी हो।

इस "मंहगाई डायन खाय जात है" वाले  ज़माने में एक स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के कर्मचारी के बैंक के अंदर दिये जाने वाली परफॉर्मेन्स की वजह से अपने घर की रसोई के आधे राशन को ख़तम होता देखकर जैसे तैसे लल्ली के बाप ने सहमी और दबी हुई आवाज से जैसे तैसे राहुल के सामने एक सवाल दागा "बेटा आने में कोई दिक्कत तो नहीं हुई ना?" 
पानीपत के मैदान में बर्फी और पकोड़ों की लाशें बिछाने में मशगूल अपनी बैंक की आदत से मजबूर राहुल का जवाब "लंच के बाद आना" सुनकर लल्ली के बाप को एक बार तो लगा कि अगर इस वक़्त काजू कतली बर्फी पर भिनभिनाता मच्छर कहीं मूत्र विसर्जित कर दे तो वो उसी में डूबकर अपने प्राणों की आहूति दे जाये।

लल्ली के बाप को एक ही सवाल से अंदाज़ा लग लिया था कि राहुल से वार्तालाप करना किसी दीवार पर गेंद मारकर इस उम्मीद को बाँधने जैसा है कि वो कामरान अकमल रुपी दीवार उस गेंद को कैच कर लेगी।

जब यह सब घट रहा था तभी कमरे के अंदर लल्ली ने सर झुकाये दबे पांव प्रवेश किया और काजू कतली और राहुल की लव स्टोरी को लव ट्राइंगल का रूप दे दिया राहुल समझ ही नहीं पा रहा था कि इस सब को हैंडल करे तो आखिर करे कैसे, आनन फानन में दोनों ने एक दूसरे को देखा और एक दूसरे के लिये हामी भी भर दी। उधर राहुल के बैंक अकॉउंट के अंदर पड़ी उसकी आधी सैलरी जो राशन वाले बनिये के गल्ले में पहुँचने से बच जाती थी उसने इस हामी के बाद उसी बनिये के गल्ले में जाने के लिये अपना सामान बांधना शुरू कर दिया।
दोनों की सगाई कर दी गई सगाई में देखने वाली बात यह थी कि जो अंगूठियाँ दोनों ने एक दूसरे को पहनाई थी वो पौने इंच के हिसार जिंदल पाइप पर आराम से फिट आ जायें।

क्या हुआ सगाई के बाद? क्या राहुल को कोई घोड़ा अपने ऊपर बिठा पाया? जानने के लिये राहुल और लल्ली की मंगनी और शादी भाग II का इंतज़ार करें।

Tuesday, March 17, 2015

एक कमाल अरुण लाल

नमस्कार दोस्तों, सब से पहले भैया जी का शुक्रिया अदा करना चाहूँगा जिन्होंने इस ख़ाकसार को यहाँ पर कुछ लिखने का मौका दिया और आप सब जो (दो चार) मेरे हाथ जोड़कर निवेदन करने पर इस बकैती को अर्टिकल समझकर जैसे तैसे पढ़ने की हिम्मत जुटाकर यहाँ आने का साहस दिखा बैठे हैं उनको मेरा प्यार भरा जय हिन्द,

बात जब अरुण लाल साहब के बारे में हो रही है तो आप सभी को तो पता ही है कि मेरे दिल में सदगोपन रमेश और अरुण लाल साहब के प्रति सम्मान राहुल गाँधी में देश का प्रधानमंत्री बनने की छमता की तरह कूट कूट कर ऐसे भरा हुआ है जो साला धोखा खाये किसी आशिक लौंडे के दिल में उसकी गर्लफ्रेंड के जैसा है जो ससुरा कभी जाता ही नहीं।
अरुण लाल साहब का पूरा नाम जगदीश लाल अरुण लाल है बताते हैं नाम का वजन इनके शरीर के संभाल पाने की छमता से कहीं जादा हो गया था और ये उस भारी भरकम से नाम के साथ ठीक से चल फिर भी नहीं पाते थे इसी वजह से इन्होंने अपना नाम बाद में अरुण लाल कर लिया था, किसको पता था यही बच्चा आगे जाकर देश भर में क्रिकेट में रूचि रखने वालों के बीच आतंक का प्रयाय बनकर उभर जायेगा और लोगों के पिछवाड़े, कान और घरों की दीवारें तक लाल कर देगा।
अरुण लाल साहब के सीधे हाथ में बल्ला थमाकर बैटिंग पर भेजने का जोखिम भारत के कई कप्तानों ने 16 टेस्ट और 13 वन डे मैचों तक उठाने जैसा साहसिक कार्य किया हुआ है माना जाता है वहीँ से इन्होंने अपनी कॉमेंट्री में कही जाने वाली लाइन "मामला जोखिम भरा हो सकता है" को सीखा था क्योंकि कप्तान इनके हाथ में बल्ला देखकर इन्ही शब्दों का जाप हनुमान चालीसा समझकर करता हुआ अक्सर देखा जाता था।

अरुण लाल सीधे हाथ से मध्यम तेज़ गेंदबाज़ी किया करते थे बताते हैं इनकी फेंकी हुई गेंद बल्लेबाज़ तक पहुँचने में जितना समय लेती थी आजकल उतने समय में क्रिस गेल और शर्मा जी के लौंडे जैसे खिलाड़ी दो सो रन बनाकर अपनी दिहाड़ी बनाने के काम पर निकल जाते हैं, शायद यही कारण था कि वो अपने 29 अंतर्राष्ट्रीय मैचों के करियर में सिर्फ 16 ही गेंदे फेंक पाये और वो 16 गेंदे भी कप्तान से जैसे तैसे आँख बचाकर किसी दूसरे गेंदबाज के पहले से ही चल रहे ओवर के बीच में ही आकर चुपचाप फेंकी गई हुआ करती थी यही वजह थी कि इनको फील्डिंग पर भी कप्तान ऐसी जगह लगाना पसन्द करता था कि जहाँ गलती से भी कोई बल्लेबाज़ शॉट ना लगा दे क्योंकि इनके हाथ से गेंद छुड़वा पाना किसी बच्चे के हाथ से किंडर जॉय छीनने के बराबर ही माना जा सकता है, यही बात आजकल कॉमेंट्री के दौरान इनके हाथ में रहने वाले माइक्रोफोन के बारे में भी कही जा सकती है वो बात अलग है कि सुनने वालों के कान और उस कमेंट्री के लिये इनको दिये जाने वाले माइक्रोफोन पनाह बेचारे दोनों ही माँगे हुए हैं। बहुत कम लोगों को याद है कि दूरदर्शन के गीत "मिले सुर मेरा तुम्हारा" में बंगाल का प्रतिनिधित्व करने के लिये जब हावड़ा ब्रिज से मछलियाँ नहीं मिल पायीं थी तो अरुण लाल साहब को ही इस काम के लिये चुना गया था, इनके बारे में ट्विटर पर भी काफ़ी कुछ कहा जाता है ट्विटर पर तो अरुण लाल के बारे में ट्वीट्स पढ़कर ऐसे लगता है जैसे किसी ख़िलाड़ी के बारे में नहीं किसी पोर्न स्टार के बारे में लिखा गया है।
अंत में अपने कुछ ट्वीट आपके सामने रख कर आपसे आज्ञा चाहूँगा ये वो ट्वीट हैं जो इनके बारे में लिखे गये हैं और काफ़ी पसंद भी किये गये हैं।

1. जब अरुण लाल क्रिकेट खेला करते थे तो वो कदमो का इस्तमाल सिर्फ आउट होकर मैदान से पवेलियन वापस आने में ही किया करते थे। @iamkits

2. बीवी के हाथ में जब बेलन हो और आप बेलन खाने वाली हरकत कर चुकें हों तो अरुण लाल साहब सिंगल हो या ना हो जोखिम उठाना ही पड़ता है।

3. अरुण लाल गेंदबाज की गेंदबाज़ी में किसी मिश्रण की तारीफ ऐसे कर रहा है जैसे उसने गेंद ना फेंकी हो अरुण लाल को जलजीरा पिला दिया हो।

4. अगर अरुण लाल की बातों पर यकीन करें तो मैच स्टेडियम छोड़कर कभी कभी किसी दिलचस्प मोड़ पर जाकर भी खेले जाने लगता है।

5. अपने दिनों में अरुण लाल गेंदबाज की लाइन लेंथ ऐसे पढ़ लिया करते थे कि गेंदबाज डर के मारे लाइन लेंथ किसी अँधेरी कोठरी में ही लिख कर डाल आते थे

Monday, March 16, 2015

एक सन्यासी शाहिद अफरीदी

वैसे तो पाकिस्तान की धरती से क्रिकेट के मैदान में एक से बढ़कर एक नमूनों ने आकर क्रिकेट के खेल को नमूना बनाने के साथ साथ खुद भी नमूना बनने की भरपूर कोशिश की है पर आज जिस नमूने की बात हो रही है उसे एक ऐसे छक्के मारने वाले खिलाड़ी के तौर पर याद किया जाता है जिसने आधे छक्के तो अपने करियर के शुरआती दौर में क्रिकेट के मैदानों में लगाये और आधे करियर के दूसरे पड़ाव में सिर्फ टीवी पर आने वाले इश्तेहारों में, 
बात पाकिस्तानी टीम के उस महान खिलाड़ी की हो रही जो अपनी कप्तानी में सचिन को शतक बनाने से रोकने के लिये अपनी पूरी टीम को ही सो रन से पहले आउट हो जाने की नसीहत दे दिया करते थे।
जी हाँ यहाँ बात उस दरियादिल शाहिद अफरीदी की हो रही है जो मैदान में कभी भी गेंद चबाकर अपने देश की भुखमरी और गरीबी जैसे बड़े ही संवेदनशील मुद्दों को दुनिया और संयुक्त राष्ट्र संघ तक समय समय पर उठाता आया है।

बात एक मार्च सन् 1980 की है पाकिस्तान के एक बिजली का करंट लगने पर बन्दे के जीवित और मृत होने की स्तिथि का जायज़ा लेने से पहले बिजली के मीटर को चेक करके बढ़े हुए बिल का जायज़ा लेने वाले एक संपन्न परिवार की एक महिला बच्चे को जन्म देने वाली थी और मामला काफ़ी जोखिम भरा होता देखकर एक बार तो इस सारे मसले पर डॉक्टरों ने नाटो सेना की मदद लेने का पूरा मन बना लिया था,
पर खासी मशक्कत के बाद आखिरकार उस महिला ने एक गोरे रंग के बच्चे को जन्म देने में "सफलता हासिल" कर ली थी जो दोनों हाथ हवा में उठाये आजीब सी मुद्रा में पैदा होने के बाद लेटा भी उसी अजीब सी मुद्रा में ही हुआ था डॉक्टरों के साथ साथ परिवार वाले भी हैरान थे कि ये आखिर है क्या बवाल,  इस सब में हैरान कर देने वाली बात यह थी कि उस महिला ने भी उस "अर्जित की हुई सफलता" के बाद ठीक उसी अंदाज़ में हाथ हवा में खड़े किये हुए थे जैसे की उस बच्चे ने। 
उस बच्चे की वो मुद्रा आप नीचे इस तस्वीर में देख सकते हैं।

उस बच्चे का नाम शाहिद अफरीदी रखा गया, किसको पता था आगे जाकर वो सहिबज़ादा मुहम्मद शाहिद खान अफरीदी नाम का वो बच्चा नाम की लंबाई के मामले में गुरमीत राम रहीम सिंह इंसान को कड़ी टक्कर देगा और हरकतों के मामले में कमाल आर खान जैसे जल्दबाज़ी में गधे का दिमाग लगाकर धरती पर भेजे गये नमूने को उसी के कार्य छेत्र में कड़ी टक्कर दे दिया करेगा।

बचपन में अक्सर भैंस पर बैठकर उसे चराते वक़्त अफरीदी साहब खुद को मोटर साईकिल पर बैठा समझकर मूँह से मोटर साईकिल की आवाज़ "बूम बूम" निकालते हुए पूरे गाँव को अपने अकल से इंजमाम उल हक़ जैसा रनर होने का सबूत देते घूमते रहते थे उनकी इसी हरकत की वजह से आगे जाकर उनका नाम बूम बूम अफरीदी भी पड़ गया था।

मैं व्यक्तिगत रूप से अफरीदी को एक ऐसा महान व्यक्ति मानता हूँ जिसको अल्लाह के फज़ल से कभी खुद के ज़ाहिल होने का कोई सबूत देने की जरूरत ही महसूस नहीं हुई वो अपनी हर साँस के साथ अपना जाहिलपना क्रिकेट के मैदानों में स्वाइन फ्लू के वायरस की तरह सन्यास ले ले कर और सन्यास से वापस आ आ कर फैलाता आया है और मुझे लगता है उसका ये केजरीवालपना आगे भी जारी ही रहने वाला है।

वैसे पाकिस्तानी खिलाडियों की अंग्रेजी के साथ कुत्ता खसेट तो जग जाहिर है ही बताते हैं एक बार किसी अंग्रेजी भाषी पाकिस्तानी कोच ने इनको "Eat, sleep, drink cricket, bowling and batting" का नारा दे दिया था बन्दे ने उसको इतना गंभीरता से ले लिया था कि दर्शकों से खचा खच भरे स्टेडियम के अंदर एक मैच के दौरान गेंद को भी राज बब्बर साहब के ठेले का 12 रूपये में पेट भर देने वाला भोजन समझ लिया था, बाद में अफरीदी की इस हरकत की वजह से क्षमाँ बेचारी गेंद को माँगनी पड़ी थी।
माफ़ी चाहूँगा गेंद के माफ़ी माँगने वाली बात का नीचे की तस्वीर से कोई लेना देना नहीं है ये बस एक संयोग मात्र ही है।

अफरीदी हमेशा से दबंग किस्म के इंसान रहे हैं बचपन में अक्सर अपनी पैंट की जेब में से सिगरेट और नशे का अन्य सामान निकलने पर डांट अपने बाप की लगा दिया करते थे, इनकी इस तरह की हरकतें अक्सर मैदान में भी देखने को मिल जाती हैं जब ये गेंद खुद घटिया फेंक कर उसके बॉउंड्री के बाहर जाने पर कसूर फील्डर का निकाल देते हैं।
पाकिस्तानी टीम के सभी नये और पुराने खिलाड़ी अफरीदी की तहे दिल से इज़्ज़त करते हैं इनको टीम के अंदर एक सभी प्रकार की "जावेद मियांदादपांति" को बखूबी अंजाम देने वाले "आल राउंडर" की नज़र से देखा जाता है।

शाहिद अफरीदी ने सन्यास लेने और फिर सन्यास से वापस आकर फिर से दोबारा क्रिकेट खेलने वाली हरकतों को जवानी में करने की घोषणा अपने स्कूल के दिनों में ही कर दी थी बताते हैं बचपन में कई बार स्कूल में अगले दिन से स्कूल ना आने की घोषणा कर दिया करते थे और अगले दिन स्कूल खुलने से भी पहले "जावेद मियांदादों" की तरह स्कूल में घुसने के लिए स्कूल के गेट का ताला खुलने से भी पहले इंतज़ार में बाहर खड़े रहा करते थे। अफरीदी की इस सन्यास लेने वाली बीमारी की वजह से आफत तो तब टूटी थी जब इन्होंने बीच सुहागरात में ही "इस सब" से सन्यास की घोषणा कर दी थी।

अफरीदी इतने हैंडसम पाकिस्तानी नवयुवकों में शुमार हैं जिनकी हर एक साँस पर पाकिस्तानी लड़कियाँ मर जाया करती हैं वो बात अलग है अफरीदी खुद अपनी इस कातिल अदा का सेहरा अपने 1 मार्च 1980 के बाद से आजतक ना किये गये किसी दन्त मंजन और दांतो के ब्रश के इस्तमाल के सर बाँधते हैं।

एक बार वेस्ट इंडीज के घातक और कभी कभी खुद की ही टीम के लिये आत्मघाती हमलावर साबित होने वाले बल्लेबाज़ क्रिस गेल का बल्ला और हैलमेट ड्रेसिंग रूम से किसी ने टपा लिया था जिसका शक जाहिर सी बात है किसी पाकिस्तानी पर ही आना था और ऐसा ही हुआ इस सारे प्रकरण पर भारत में हिंदी कमेंट्री के ताबूत में आखिरी कील ठोकने वाले महान वक्ता अरुण लाल के साथी कमेंटेटर कपिल देव ने अपने चिरपरिचित अंदाज़ में कहा था "ऐसा तो नहीं कह सकते कि शाहिद अफरीदी ने क्रिस गेल का बल्ला और हैलमेट चुराया है हाँ ये जरूर कह सकते हैं कि बल्ला और हैलमेट तोड़कर सबूत जरूर मिटाया गया है"

एक ज़माने में सबसे तेज़ शतक का रिकॉर्ड अपने नाम रखने वाले शाहिद अफरीदी ने हाल ही में सब से धीमे 8000 रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज़ किया है, ये ऐसा रिकॉर्ड है जिसके बारे में मानसिक रूप से प्रताड़ित लोगों को इसके बारे में बताकर हँसाया जाता है मुन्ना भाई एम् बी बी में बने सब्जेक्ट को भी यही बताकर कॉमा से बाहर लाया गया था जिसकी वजह से आज वो कई फ़िल्मो में अदाकारी करते हुए देखे जाते हैं।

शाहिद अफरीदी बहुत ही भावुक किस्म के इंसान है इनके घर के आसपास जब किसी की "मट्टी" (देहांत) हो जाती है तो दिलासा देने में इतने निपुण हैं कि कई बार जिस बन्दे की बीवी गुज़र गई हो उस बेचारे बिलख बिलख कर रोते शौहर को "दिल छोटा ना करो मैं भी तुम्हारी बेगम की तरह ही हूँ" कहकर दोस्ताना II बनाने का न्योता देकर घर आ जाते हैं।

अंत में इतना कहूँगा कि शाहिद अफरीदी के "आखिरी सन्यास" के बाद पाकिस्तान की तरफ से क्रिकेट के मैदानों में भेजे जाने वाले नमूनों की कमी कभी नहीं होगी आजकल अहमद शहजाद जैसे पूतों ने अपने पैर पालने में ही दिखाने शुरू कर दिये हैं।



Tuesday, March 3, 2015

स्पिन जादूगर रोमेश पॉवर

आप सभी पाठकों को किट्टू सिंह राठौड़ का प्यार भरा नमस्कार, आज बात उस शख्स के बारे में हो रही है जिसकी तारीफ करने के लिये अमुमन लोगों को शब्द भी किसी ट्रक में लोड करवाकर मँगवाने पड़ जाते हैं और वो भी अन्ना के "नो टन अन्ना" अभियान की अनदेखी करने के बावजूद भी पूरे नहीं पहुंच पाते और बेचारी तारीफ भी महबूबा की शादी में कुर्सियां लगाते किसी नाकाम आशिक की अपनी महबूबा से शादी करने की चाहत की तरह अधूरी ही रह जाती है,

जी हाँ यहाँ बात भरी जवानी में गर्भवती पुरुष बनकर सड़को पर धूमते लौंडो के फिटनेस आदर्श और भारत के स्पिन जादूगर कहे जाने वाले गेंदबाज रोमेश पॉवर की हो रही है।
वैसे तो रोमेश पॉवर की तारीफ में कुछ कहना भरी दोपहरी में हाथ में दिया पकड़कर सूरज को रौशनी देने की कोशिश में अपना चूतिया कटवाने जैसा है, फिर भी लोग ऐसे महान शख्स की तारीफ करने से खुद को नहीं रोक पाते, इस समय मुझे भी इनके बारे में लिखते हुए लाखों किलोमीटर का सफ़र तय करके हिन्द महासागर में दो बूँद पानी डालने जाने जैसा ही प्रतीत हो रहा है।
स्पिन के जादूगर रोमेश पॉवर का जन्म महाराष्ट के नागपुर में हुआ था हालाँकि मुम्बई वालों को हमेशा इस बात का मलाल रहता है कि इतना महान गेंदबाज आखिर उनकी सरजमीं पर पैदा होने से मुकर क्यों गया, कहा यहाँ तक जाता है कि इनके कुछ हार्डकोर फैन्स इनके जन्म लेने की घटना को जन्म लेना कम इनका अवतार लेना जादा मानते हैं।
क्रिकेट और स्पिन गेंदबाज़ी के प्रति उनका लगाव उनके परिवार वालों ने बचपन में ही चौबीस घंटे उनके नीचे लटकी दो गेंदों को पकड़ के स्पिन कराने की कोशिश में लगे रहते हुए ही देख लिया था और अंदाज़ा भी लगा लिया था कि ये लौंडा जरूर बड़ा होकर कोई ना कोई कांड करेगा।
बताते हैं रोमेश पॉवर जब क्रिकेट सीखने का इरादा लेकर अपने कोच के पास पहुँचे थे तो कोच को ये सोचने में पूरा दिन ही निकल गया था कि लौंडा आया तो क्रिकेट खेलने है पर ससुरी फुटबॉल पेट में लिये क्यों घूम रहा है।

रोमेश पॉवर गेंद को हाथों से फेंककर स्पिन ही नहीं करते थे कभी कभी गेंद के साथ खुद स्पिन होकर उसको स्पिन होना सिखाया करते थे जैसा की आप ऊपर लगी तस्वीर में देख सकते हैं।
रोमेश पॉवर को सामाजिक कार्यों के लिये भी याद किया जाता है माना जाता है ग्लोबल वार्मिंग बहुत जादा बढ़ने पर ही इन्होंने एक विशेष प्रकार का चश्मा दिन और रात दोनों समयों में पहनकर गेंदबाज़ी करना शुरू किया था, वैज्ञानिकों का मानना है सारी ग्लोबल वार्मिंग पॉवर साहब का वो चश्मा ही अपने अंदर सोख लेता है इसी लिये पृथ्वी पर लोगों का लगातार जीवित रहना संभव हो पाया है।
अब मैं आपको रोमेश पॉवर की अदभुत गेंदबाज़ी के एक रहस्य के बारे बताना चाहूँगा, असल में रोमेश पॉवर एक तेज़ गेंदबाज हैं वो तो उनका वज़न बहुत अधिक होने की वजह से पिच का बैटिंग वाला छोर किसी जरूरत से अधिक लोड लेकर चलती घोड़ा गाड़ी के हवा में लटके घोड़े की तरह आगे से उठ जाता है और गुरुत्वाकर्षण के नियम के कारण गेंद धीमी होकर ही बल्लेबाज़ के पास पहुँचती है, यह प्रक्रिया इतनी तेज़ गति से होती है कि ना तो उसको मैदान में लगा कोई कैमरा देख पाता है और ना ही मैदान में बैठकर मैच देखने वाले लोग इस प्रक्रिया को सिर्फ बकैती के 3D चश्मे से ही देखा जा सकता है जो अमूमन हम लोग ट्विटर पर अपने डिस्प्ले तस्वीरों में 3D चश्मे की तरह इस्तमाल करते हैं।
रोमेश पॉवर ने देश की सेवा टेस्ट और वन डे दोनों टीमों में रहकर कुछ समय तक बड़ी महनत और लगन के साथ की थी और बाद में भारत ने नियमित रूप से रोमेश पॉवर को टीम में खिलाना इसलिए बंद का दिया था क्योंकि ICC के नियमो के अनुसार आप हथियार लेकर मैदान में नहीं जा सकते और  रोमेश पॉवर तो वैसे भी सिर्फ एक हथियार ही नहीं परमाणु हथियार है, वैसे मैं व्यक्तिगत रूप से इस नियम से सहमत नहीं हूँ मेरा मानना है  पुरुषों के क्रिकेट में मैदान में हथियार तो सभी खिलाडी अपने साथ ही लेकर घुसते हैं।
ऑस्ट्रेलिया में चल रहे विश्व कप में शिखर धवन ने जो शतक साउथ अफ्रीका के खिलाफ लगाया है उसका सेहरा भी शिखर ने इन्ही साहब के सर पर बाँधा है शिखर का कहना है कि मैच से ठीक पहले रोमेश पॉवर ने फ़ोन करके मुझे ये समझाया था कि स्टेन और मोकल के खिलाफ किस तरह बैटिंग की जानी चाहिये और मैंने ठीक उसका उल्टा किया और नतीजा आप सबके सामने है।
उसी मैच में AB डेविलिएर्स को आउट करवाने में भी रोमेश पॉवर का ही हाथ बताया जा रहा है सूत्रों के हवाले से पता चला है कि धोनी ने पीछे से कह दिया था कि अगला ओवर रोमेश पॉवर वहीँ इंडिया से बैठे बैठे फेंक देगा और यह सुनते ही AB  डेविलिएर्स खौफ़ के मारे उसी गेंद पर रन आउट हो कर पवेलियन लौट गया था, भारतीय कप्तान का कहना है उन्होंने कई अहम् मौकों पर इसी तरह खेल का रुख अपनी तरफ मौड़ा है भारतीय कप्तान ने आगे ये भी कहा कि टी20 वर्ल्ड कप के फाइनल में मिस्बाह के अचानक उस उलटे झाड़ू लगा देने की पीछे भी रोमेश पॉवर का ही हाथ था।
अंत में कहना चाहूँगा मेरी क्रिकेटिंग नॉलेज के हिसाब से रोमेश पॉवर एक बेहतरीन ऑफ स्पिनर थे जिसको उसका असली मुकाम BCCI और सभी भारतीय कप्तान नहीं दे पाये जो उसको मिलना चाहिए आप इस बात से अंदाज़ा लगा सकते हैं कि गूगल पर रोमेश पॉवर की तस्वीरें खोजे जाने पर शरद पवार की मूँह के कैंसर के बचाव के लिये चेतावनी के तौर पर जनहित में जारी की गई तस्वीरें सामने आ जाती हैं।