वैसे तो पाकिस्तान की धरती से क्रिकेट के मैदान में एक से बढ़कर एक नमूनों ने आकर क्रिकेट के खेल को नमूना बनाने के साथ साथ खुद भी नमूना बनने की भरपूर कोशिश की है पर आज जिस नमूने की बात हो रही है उसे एक ऐसे छक्के मारने वाले खिलाड़ी के तौर पर याद किया जाता है जिसने आधे छक्के तो अपने करियर के शुरआती दौर में क्रिकेट के मैदानों में लगाये और आधे करियर के दूसरे पड़ाव में सिर्फ टीवी पर आने वाले इश्तेहारों में,
बात पाकिस्तानी टीम के उस महान खिलाड़ी की हो रही जो अपनी कप्तानी में सचिन को शतक बनाने से रोकने के लिये अपनी पूरी टीम को ही सो रन से पहले आउट हो जाने की नसीहत दे दिया करते थे।
जी हाँ यहाँ बात उस दरियादिल शाहिद अफरीदी की हो रही है जो मैदान में कभी भी गेंद चबाकर अपने देश की भुखमरी और गरीबी जैसे बड़े ही संवेदनशील मुद्दों को दुनिया और संयुक्त राष्ट्र संघ तक समय समय पर उठाता आया है।
बात एक मार्च सन् 1980 की है पाकिस्तान के एक बिजली का करंट लगने पर बन्दे के जीवित और मृत होने की स्तिथि का जायज़ा लेने से पहले बिजली के मीटर को चेक करके बढ़े हुए बिल का जायज़ा लेने वाले एक संपन्न परिवार की एक महिला बच्चे को जन्म देने वाली थी और मामला काफ़ी जोखिम भरा होता देखकर एक बार तो इस सारे मसले पर डॉक्टरों ने नाटो सेना की मदद लेने का पूरा मन बना लिया था,
पर खासी मशक्कत के बाद आखिरकार उस महिला ने एक गोरे रंग के बच्चे को जन्म देने में "सफलता हासिल" कर ली थी जो दोनों हाथ हवा में उठाये आजीब सी मुद्रा में पैदा होने के बाद लेटा भी उसी अजीब सी मुद्रा में ही हुआ था डॉक्टरों के साथ साथ परिवार वाले भी हैरान थे कि ये आखिर है क्या बवाल, इस सब में हैरान कर देने वाली बात यह थी कि उस महिला ने भी उस "अर्जित की हुई सफलता" के बाद ठीक उसी अंदाज़ में हाथ हवा में खड़े किये हुए थे जैसे की उस बच्चे ने।
उस बच्चे की वो मुद्रा आप नीचे इस तस्वीर में देख सकते हैं।
उस बच्चे का नाम शाहिद अफरीदी रखा गया, किसको पता था आगे जाकर वो सहिबज़ादा मुहम्मद शाहिद खान अफरीदी नाम का वो बच्चा नाम की लंबाई के मामले में गुरमीत राम रहीम सिंह इंसान को कड़ी टक्कर देगा और हरकतों के मामले में कमाल आर खान जैसे जल्दबाज़ी में गधे का दिमाग लगाकर धरती पर भेजे गये नमूने को उसी के कार्य छेत्र में कड़ी टक्कर दे दिया करेगा।
बचपन में अक्सर भैंस पर बैठकर उसे चराते वक़्त अफरीदी साहब खुद को मोटर साईकिल पर बैठा समझकर मूँह से मोटर साईकिल की आवाज़ "बूम बूम" निकालते हुए पूरे गाँव को अपने अकल से इंजमाम उल हक़ जैसा रनर होने का सबूत देते घूमते रहते थे उनकी इसी हरकत की वजह से आगे जाकर उनका नाम बूम बूम अफरीदी भी पड़ गया था।
मैं व्यक्तिगत रूप से अफरीदी को एक ऐसा महान व्यक्ति मानता हूँ जिसको अल्लाह के फज़ल से कभी खुद के ज़ाहिल होने का कोई सबूत देने की जरूरत ही महसूस नहीं हुई वो अपनी हर साँस के साथ अपना जाहिलपना क्रिकेट के मैदानों में स्वाइन फ्लू के वायरस की तरह सन्यास ले ले कर और सन्यास से वापस आ आ कर फैलाता आया है और मुझे लगता है उसका ये केजरीवालपना आगे भी जारी ही रहने वाला है।
वैसे पाकिस्तानी खिलाडियों की अंग्रेजी के साथ कुत्ता खसेट तो जग जाहिर है ही बताते हैं एक बार किसी अंग्रेजी भाषी पाकिस्तानी कोच ने इनको "Eat, sleep, drink cricket, bowling and batting" का नारा दे दिया था बन्दे ने उसको इतना गंभीरता से ले लिया था कि दर्शकों से खचा खच भरे स्टेडियम के अंदर एक मैच के दौरान गेंद को भी राज बब्बर साहब के ठेले का 12 रूपये में पेट भर देने वाला भोजन समझ लिया था, बाद में अफरीदी की इस हरकत की वजह से क्षमाँ बेचारी गेंद को माँगनी पड़ी थी।
माफ़ी चाहूँगा गेंद के माफ़ी माँगने वाली बात का नीचे की तस्वीर से कोई लेना देना नहीं है ये बस एक संयोग मात्र ही है।
अफरीदी हमेशा से दबंग किस्म के इंसान रहे हैं बचपन में अक्सर अपनी पैंट की जेब में से सिगरेट और नशे का अन्य सामान निकलने पर डांट अपने बाप की लगा दिया करते थे, इनकी इस तरह की हरकतें अक्सर मैदान में भी देखने को मिल जाती हैं जब ये गेंद खुद घटिया फेंक कर उसके बॉउंड्री के बाहर जाने पर कसूर फील्डर का निकाल देते हैं।
पाकिस्तानी टीम के सभी नये और पुराने खिलाड़ी अफरीदी की तहे दिल से इज़्ज़त करते हैं इनको टीम के अंदर एक सभी प्रकार की "जावेद मियांदादपांति" को बखूबी अंजाम देने वाले "आल राउंडर" की नज़र से देखा जाता है।
शाहिद अफरीदी ने सन्यास लेने और फिर सन्यास से वापस आकर फिर से दोबारा क्रिकेट खेलने वाली हरकतों को जवानी में करने की घोषणा अपने स्कूल के दिनों में ही कर दी थी बताते हैं बचपन में कई बार स्कूल में अगले दिन से स्कूल ना आने की घोषणा कर दिया करते थे और अगले दिन स्कूल खुलने से भी पहले "जावेद मियांदादों" की तरह स्कूल में घुसने के लिए स्कूल के गेट का ताला खुलने से भी पहले इंतज़ार में बाहर खड़े रहा करते थे। अफरीदी की इस सन्यास लेने वाली बीमारी की वजह से आफत तो तब टूटी थी जब इन्होंने बीच सुहागरात में ही "इस सब" से सन्यास की घोषणा कर दी थी।
अफरीदी इतने हैंडसम पाकिस्तानी नवयुवकों में शुमार हैं जिनकी हर एक साँस पर पाकिस्तानी लड़कियाँ मर जाया करती हैं वो बात अलग है अफरीदी खुद अपनी इस कातिल अदा का सेहरा अपने 1 मार्च 1980 के बाद से आजतक ना किये गये किसी दन्त मंजन और दांतो के ब्रश के इस्तमाल के सर बाँधते हैं।
एक बार वेस्ट इंडीज के घातक और कभी कभी खुद की ही टीम के लिये आत्मघाती हमलावर साबित होने वाले बल्लेबाज़ क्रिस गेल का बल्ला और हैलमेट ड्रेसिंग रूम से किसी ने टपा लिया था जिसका शक जाहिर सी बात है किसी पाकिस्तानी पर ही आना था और ऐसा ही हुआ इस सारे प्रकरण पर भारत में हिंदी कमेंट्री के ताबूत में आखिरी कील ठोकने वाले महान वक्ता अरुण लाल के साथी कमेंटेटर कपिल देव ने अपने चिरपरिचित अंदाज़ में कहा था "ऐसा तो नहीं कह सकते कि शाहिद अफरीदी ने क्रिस गेल का बल्ला और हैलमेट चुराया है हाँ ये जरूर कह सकते हैं कि बल्ला और हैलमेट तोड़कर सबूत जरूर मिटाया गया है"
एक ज़माने में सबसे तेज़ शतक का रिकॉर्ड अपने नाम रखने वाले शाहिद अफरीदी ने हाल ही में सब से धीमे 8000 रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज़ किया है, ये ऐसा रिकॉर्ड है जिसके बारे में मानसिक रूप से प्रताड़ित लोगों को इसके बारे में बताकर हँसाया जाता है मुन्ना भाई एम् बी बी में बने सब्जेक्ट को भी यही बताकर कॉमा से बाहर लाया गया था जिसकी वजह से आज वो कई फ़िल्मो में अदाकारी करते हुए देखे जाते हैं।
शाहिद अफरीदी बहुत ही भावुक किस्म के इंसान है इनके घर के आसपास जब किसी की "मट्टी" (देहांत) हो जाती है तो दिलासा देने में इतने निपुण हैं कि कई बार जिस बन्दे की बीवी गुज़र गई हो उस बेचारे बिलख बिलख कर रोते शौहर को "दिल छोटा ना करो मैं भी तुम्हारी बेगम की तरह ही हूँ" कहकर दोस्ताना II बनाने का न्योता देकर घर आ जाते हैं।
अंत में इतना कहूँगा कि शाहिद अफरीदी के "आखिरी सन्यास" के बाद पाकिस्तान की तरफ से क्रिकेट के मैदानों में भेजे जाने वाले नमूनों की कमी कभी नहीं होगी आजकल अहमद शहजाद जैसे पूतों ने अपने पैर पालने में ही दिखाने शुरू कर दिये हैं।



:) dekhate hai kab sanyas lete hai
ReplyDelete@PuraneeBastee