Tuesday, March 17, 2015

एक कमाल अरुण लाल

नमस्कार दोस्तों, सब से पहले भैया जी का शुक्रिया अदा करना चाहूँगा जिन्होंने इस ख़ाकसार को यहाँ पर कुछ लिखने का मौका दिया और आप सब जो (दो चार) मेरे हाथ जोड़कर निवेदन करने पर इस बकैती को अर्टिकल समझकर जैसे तैसे पढ़ने की हिम्मत जुटाकर यहाँ आने का साहस दिखा बैठे हैं उनको मेरा प्यार भरा जय हिन्द,

बात जब अरुण लाल साहब के बारे में हो रही है तो आप सभी को तो पता ही है कि मेरे दिल में सदगोपन रमेश और अरुण लाल साहब के प्रति सम्मान राहुल गाँधी में देश का प्रधानमंत्री बनने की छमता की तरह कूट कूट कर ऐसे भरा हुआ है जो साला धोखा खाये किसी आशिक लौंडे के दिल में उसकी गर्लफ्रेंड के जैसा है जो ससुरा कभी जाता ही नहीं।
अरुण लाल साहब का पूरा नाम जगदीश लाल अरुण लाल है बताते हैं नाम का वजन इनके शरीर के संभाल पाने की छमता से कहीं जादा हो गया था और ये उस भारी भरकम से नाम के साथ ठीक से चल फिर भी नहीं पाते थे इसी वजह से इन्होंने अपना नाम बाद में अरुण लाल कर लिया था, किसको पता था यही बच्चा आगे जाकर देश भर में क्रिकेट में रूचि रखने वालों के बीच आतंक का प्रयाय बनकर उभर जायेगा और लोगों के पिछवाड़े, कान और घरों की दीवारें तक लाल कर देगा।
अरुण लाल साहब के सीधे हाथ में बल्ला थमाकर बैटिंग पर भेजने का जोखिम भारत के कई कप्तानों ने 16 टेस्ट और 13 वन डे मैचों तक उठाने जैसा साहसिक कार्य किया हुआ है माना जाता है वहीँ से इन्होंने अपनी कॉमेंट्री में कही जाने वाली लाइन "मामला जोखिम भरा हो सकता है" को सीखा था क्योंकि कप्तान इनके हाथ में बल्ला देखकर इन्ही शब्दों का जाप हनुमान चालीसा समझकर करता हुआ अक्सर देखा जाता था।

अरुण लाल सीधे हाथ से मध्यम तेज़ गेंदबाज़ी किया करते थे बताते हैं इनकी फेंकी हुई गेंद बल्लेबाज़ तक पहुँचने में जितना समय लेती थी आजकल उतने समय में क्रिस गेल और शर्मा जी के लौंडे जैसे खिलाड़ी दो सो रन बनाकर अपनी दिहाड़ी बनाने के काम पर निकल जाते हैं, शायद यही कारण था कि वो अपने 29 अंतर्राष्ट्रीय मैचों के करियर में सिर्फ 16 ही गेंदे फेंक पाये और वो 16 गेंदे भी कप्तान से जैसे तैसे आँख बचाकर किसी दूसरे गेंदबाज के पहले से ही चल रहे ओवर के बीच में ही आकर चुपचाप फेंकी गई हुआ करती थी यही वजह थी कि इनको फील्डिंग पर भी कप्तान ऐसी जगह लगाना पसन्द करता था कि जहाँ गलती से भी कोई बल्लेबाज़ शॉट ना लगा दे क्योंकि इनके हाथ से गेंद छुड़वा पाना किसी बच्चे के हाथ से किंडर जॉय छीनने के बराबर ही माना जा सकता है, यही बात आजकल कॉमेंट्री के दौरान इनके हाथ में रहने वाले माइक्रोफोन के बारे में भी कही जा सकती है वो बात अलग है कि सुनने वालों के कान और उस कमेंट्री के लिये इनको दिये जाने वाले माइक्रोफोन पनाह बेचारे दोनों ही माँगे हुए हैं। बहुत कम लोगों को याद है कि दूरदर्शन के गीत "मिले सुर मेरा तुम्हारा" में बंगाल का प्रतिनिधित्व करने के लिये जब हावड़ा ब्रिज से मछलियाँ नहीं मिल पायीं थी तो अरुण लाल साहब को ही इस काम के लिये चुना गया था, इनके बारे में ट्विटर पर भी काफ़ी कुछ कहा जाता है ट्विटर पर तो अरुण लाल के बारे में ट्वीट्स पढ़कर ऐसे लगता है जैसे किसी ख़िलाड़ी के बारे में नहीं किसी पोर्न स्टार के बारे में लिखा गया है।
अंत में अपने कुछ ट्वीट आपके सामने रख कर आपसे आज्ञा चाहूँगा ये वो ट्वीट हैं जो इनके बारे में लिखे गये हैं और काफ़ी पसंद भी किये गये हैं।

1. जब अरुण लाल क्रिकेट खेला करते थे तो वो कदमो का इस्तमाल सिर्फ आउट होकर मैदान से पवेलियन वापस आने में ही किया करते थे। @iamkits

2. बीवी के हाथ में जब बेलन हो और आप बेलन खाने वाली हरकत कर चुकें हों तो अरुण लाल साहब सिंगल हो या ना हो जोखिम उठाना ही पड़ता है।

3. अरुण लाल गेंदबाज की गेंदबाज़ी में किसी मिश्रण की तारीफ ऐसे कर रहा है जैसे उसने गेंद ना फेंकी हो अरुण लाल को जलजीरा पिला दिया हो।

4. अगर अरुण लाल की बातों पर यकीन करें तो मैच स्टेडियम छोड़कर कभी कभी किसी दिलचस्प मोड़ पर जाकर भी खेले जाने लगता है।

5. अपने दिनों में अरुण लाल गेंदबाज की लाइन लेंथ ऐसे पढ़ लिया करते थे कि गेंदबाज डर के मारे लाइन लेंथ किसी अँधेरी कोठरी में ही लिख कर डाल आते थे

1 comment:

  1. लोल :) मैंने कई सालो से क्रिकेट नहीं देखा है लेकिन इस हास्य के माध्यम से लाल साहब की कमेंटरी को थोड़ा बहुत समझ गया
    @PuraneeBastee
    http://puraneebastee.blogspot.in/

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